सिमरन की माला सांसों में लिए
कांटो के दामन में चलते रहे,
आपको याद करते, और दिन गुज़रते रहे,
रात खामोशियों से गुफ्तगू में बीत जाती,अक्सर
और तन्हाईयों से रिश्ते गहरे होते रहे।
कांटो के दामन में चलते रहे,
आपको याद करते, और दिन गुज़रते रहे,
रात खामोशियों से गुफ्तगू में बीत जाती,अक्सर
और तन्हाईयों से रिश्ते गहरे होते रहे।
एक सदी सी गुज़री है अभी अभी
पर इन आँखों में नमी है वैसी हिं
लोग कहते रहे कि ज़ुल्म सहते हो क्यों?
और हम ज़ुल्म की बेबसी पे हँसते रहे।
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