poet shire

poetry blog.

Tuesday, August 20, 2019

Some mesmerizing butterflies

These pictures were clicked by me out of idleness. Hope viewers enjoy it.
Camera : Oppo A3f
Location : Danwar village














Wednesday, April 17, 2019

प्रतिबिम्ब

जब भी देखता हूँ मैं खुद को
इन कविताओं में तुम्हारी,
जिंदगी बड़ी रंगीन सी दिखती है,
ये आयाम है कैसे पैगाम खबर नही
है ये इश्क़ का फ़ितूर या जुनून खबर नही
पर इस बात का गुरुर मुझे है जरूर ।

Saturday, November 24, 2018

जुदाई की वेदना

ऐ जाने वाले 
मुझसे जुदा होने पे,खुद पे ये जुल्म न कर
अभी बहुत आशियाँ देखने हैं तुझे 
हमने जो खोया एक दूजे से टूटकर 
उसके इल्जाम ए इल्म से बच 
तेरे आंखों में सपनो के समंदर देखे हैं मैंने
उन सपनो का बहिस्कार न कर।

तो क्या हुआ एक सितारा जो अति प्यारा था
वो टूट गया, एक साथी था जो छूट गया
वक़्त के नजाकत में खुद नाजुक न बन।
मेरी न सही खुद की कदर कर
तेरे सपनोँ के समन का इन्तेकाम न कर 
मैं तेरा न सही, तू खुद की अपनी तो है।

Sunday, November 18, 2018

गुट्बजों की नगरी, ये गगरी!

दुनिया एक गगरी जिसमे 
है बस गुटबाज़ी हरी-भरी।

न कोई मुल्ला यहां 
न यहां कोई बुद्ध
फिर भी हो रहा 
ये कैसा धरम युद्ध

न दिखते देवदूत कोई
न दिखता कोई पिसाच 
फिर भी करम परखते 
दिखता है बस इंसान यहाँ।

गुटबाज़ों की नगरी में है अपने ही तौर बसे 
तंज़ व्यंग को हीं, है धर्म ग्रंथ पड़े हुए
इनका हुआ ना कोई अनुयायी यहाँ
धर्म ग्रंथ के पन्नो की ना कोई परछाईं यहाँ।
सुर्ख होठों से जो,
राख की कीमत पूछ ली
वो जलते रहे 
इनकार के बहानो में।

बयां के रंग।

अंदाज़ ए बयां उनके, महताब से हैं
ये दिल के शिकन भी कह देते हैं
और शब ए ग़म झलकते भी नही।

बेताबियां ए उल्फत से खींच लेते हैं
अंजाम, जिक्र ए फिराक का 
और बताते भी नही 
ज़ुल्मत ए शब मिज़ाज़ का।

Wednesday, August 29, 2018

आयतें

जर्द ए शब लिए
और कितना जिएं हम
पर अपना दर्द भी किससे कहे हम

एक दीवार है
प्रियतम उस पार है
ऐतबार ए दरख्त
जा पहुंची दीवार के ऊपर
आयतों की बेलें उग आयीं हैं
उनपर,
कुछ मेरी कुछ उनकी।

पुष्पाञ्जलि दरख्त के नीचे
मोगरे सिमट गए
ये प्रेम कहानी कह।







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